Sunday, August 9, 2009

क्योंकि


लिखता हूँ

शायद इसलिए

की अगर लिखूं नहीं तो लगातार किसी और को पढ़ते रहना होगा

किसी और के हर्फ़ को जेहन में जगह देनी होगी

और अपनी नजमा अपने सीने में ही उलझी रहेगी

मिसरे तालू टटोलते रहेंगे


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